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इतिहास के गर्भ में छुपी अनकही कहानियों में से एक है

ब्यूरो संवाददाता बालकराम भट्ट (रामा भट्ट,मुंबई)

इतिहास के गर्भ में छुपी अनकही कहानियों में से एक है 48 कोस
लेखक, निर्माता, निर्देशक राजिंदर वर्मा ‘यशबाबू’ का कहना है की हमारे साहित्य में ऐसे कई पात्र एवं चरित्र है जिनका उल्लेख शायद हमारी नौजवान पीढ़ी भूल गयी है। एक सवाल का जवाब देते हुए राजिंदर वर्मा ‘यशबाबू’ कहते हैं कि हमारे इतिहास के गर्भ में ऐसी कई कहानियां है जो आज भी अनकही है।

अगर आज के लेखक चाहे तो वह कहानियां भी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती हैं। हिन्दी फीचर फिल्म ‘48 कोस’ द्वारा उनकी कोशिश कुरुक्षेत्र का नाम विश्व पटल पर ले जाने की है। राजिंदर वर्मा ने कहानी के संदर्भ में बताया कि बचपन से ही वह महाभारत से प्रभावित थे। 48 कोस के द्वारपाल यक्षों की कहानियां उनको बहुत आकर्षक लगती थी। इन्हीं कहानियों को वह आधुनिक रूप में दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना चाहते थे।

कहानी को अपने स्वरूप में आने में डेढ़ साल लगा। राजिंदर वर्मा ने यह भी कहा कि वह दावे के साथ बोल सकते हैं कि यह फीचर फिल्म दर्शकों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाएगी और सोचने पर मजबूर कर देगी। इस फिल्म में नामी कलाकार पंकज बेरी, अनिल धवन, अरुण बक्शी, सोहित सोनी, अनिल वर्मा, जागृति ठाकुर, नलिनी खत्री, योगिता पॉल के अलावा बाल कलाकार आरव वधवा, गर्वित खुराना, रीतिका राय, जय रल्हन ने विशेष रूप से काम किया है। फिल्म की कहानी राजिन्द्र वर्मा, पटकथा थामन ए., छायाकार विरेन्द्र कुमार, सम्पादन सुनील अरोड़ा का है तथा फिल्म में गीत संदीप गौड़ व संगीत अरुण बक्शी व विकास रल्हन ने दिया है। यशबाबू एंटरटेनमैंट द्वारा निर्मित फिल्म ‘48 कोस’ सिनेमाघरों में 8 जुलाई को रिलीज हो रही है।

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