कालसी जनजाति क्षेत्र में अनोखा दशहरा: श्राप से मुक्ति के लिए उदपाल्टा और कुरौली के मध्य होता है गागली युद्ध

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UK/विकासनगर।
रिपोर्ट- इलम सिंह चौहान

अनोखा दशहरा: श्राप से मुक्ति के लिए उदपाल्टा और कुरौली के मध्य होता है गागली युद्ध

– एक तरफ जहां आज पूरे देश मे विजयदशमी का त्यौहार बडी धूमधाम से मनाया जा रहा है वही देहरादून के चकराता जनजातीय क्षेत्र के उतपाल्टा व कुरोली गांव के लोग दशहरे पर्व को अनोखे अंदाज में मनाते हैं यहां के स्थानीय लोगों का कहना है सदियों पहले अष्टमी के दिन गांव की दो कन्याऐं गांव से थोडी दूर स्थित एक कुंए से पानी भरने गई।

पानी भरते समय रानी का पांव फिसल गया और वह गहरे कुंए मे जा गिरी। मुन्नी जब इस बात की खबर देने गांव पहुंची तो गांव वालों ने मुन्नी पर ये आरोप जड दिया कि रानी को तुमने ही पानी के कुंए मे धक्का दिया होगा। जिससे दुखी होकर मुन्नी ने भी कुंए मे छलांग लगा दी और उसकी भी मृत्यु हो गई।

उसके बाद दो परिवारों के मध्य युद्ध हुआ श्राप से मुक्ति के लिए उत्पाल्टा व कुरोली गांव हर साल विजयदशमी के दिन घास की रानी और मुन्नी बनाकर इस कुंए मे विसर्जित करते है। गांव के बुजुर्गो का कहना है कि जब तक इस गांव मे विजयदशमी के दिन एक साथ दो कन्याएं जन्म नहीं लेगी तबतक हर साल गांव वालों को इसी तरह गागली युद्ध करना पडेगा।

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