देहरादून, 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर नैशनल एसोसिएशन फ़ॉर पैरेंट्स एन्ड स्टूडेंट्स राइट्स ने खट खटाया मानव अधिकार का दरवाजा।

देहरादून,15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (NAPSR) ने खटखटाया मानव अधिकार आयोग का दरवाजा ।
देहरादून :- आज दिनांक 9अक्टूबर नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (NAPSR) राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट सुदेश उनियाल ने 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने के फैसले और निजी स्कूलों की ओर से रखी गयी शर्तों के विरोध मे उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग मे अपील भेजकर स्कूल खोले जाने को लेकर आपत्ति जताई है,अपील मे कहा गया है कि उत्तराखंड मे न दोहराएं आंध्र प्रदेश की घटना अपील मे यह भी कहा गया है कि जिस प्रकार से केंद्र सरकार ने लॉक डाउन 05 के चलते स्कूलों को खोले जाने का निर्णय राज्य सरकारों पर छोड़ा है।और उत्तराखंड सरकार ने अभिभावकों व स्कूल संचालकों की सहमति से स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया है वह सरकार की ओर से लिया गया एक सरहानीय कदम है। वहीं एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान का कहना है कि निजी स्कूल संचालकों ने अभिभवाकों और सरकार के सामने स्कूल खोलने को लेकर अपनी 05 शर्तें रखी हैं उनसे अभिभावक सकते मे है। और कोरोना के प्रकोप को देखते हुए अपने बच्चों को स्कूल न भेजने का निर्णय कर चुके हैं।क्योंकि स्कूल संचालकों ने अभिभावकों से यह लिखित पत्र मांग कर कि यदि स्कूल खुलने पर किसी बच्चे को कुछ हो गया तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी अभिभावक की होगी स्कूल प्रबंधक, प्रिंसिपल,टीचर्स व स्टाफ पर किसी प्रकार का मुकदमा दर्ज नही होगा यह दर्शाता है कि स्कूल हमारे बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार से कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है।जिसके कारण हम अभिभावक अपने बच्चे स्कूल भेजकर उनकी जान और भविष्य से खिलवाड़ नही कर सकते ।
अतः हम एसोसिएशन के माध्यम से आपसे अनुरोध करते हैं। कि जब तक कोरोना का प्रकोप कम नही हो जाता।इसकी वैक्सीन नही आ जाती या स्कूल संचालक और सरकार बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नही लेते तब तक स्कूलों को खोलने का निर्णय को लेकर राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए कि अभी स्कूलों को खोलना उचित नही होगा ।




