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दो सगी नाबालिक बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या के आरोपि को कोर्ट ने सुनाई मृत्यु की सजा

पुलिस के द्वारा हिंदी मैगजीन के मीडिया प्रभारी नरेंद्र कुमार राठौर देहरादून उत्तराखंड

कोतवाली ऋषिकेश, देहरादून।*

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
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दो सगी *नाबालिग* बहनों की बलात्कार के बाद हत्या करने के आरोपी को पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत मृत्यु की सजा।
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दिनांक 15-6-2017 को कोतवाली ऋषिकेश में शिकायतकर्ता श्रीमती सीता श्रेष्ठ पत्नी श्री सूरत श्रेष्ठ निवासी किराएदार अमरजीत सिंह पंजाब एंड सिंध बैंक के पास श्यामपुर के द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा मेरी दो नाबालिग लड़कियों की हत्या कर दी गई है, जिनकी उम्र क्रमशः 13 वर्ष व 04 वर्ष थी। जिस पर तत्काल ऋषिकेश पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई तथा कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा अपराध संख्या 332/17 धारा 302/376 व 5/6 पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया। जिसके सफल निस्तारण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय देहरादून द्वारा तत्काल मामले की गंभीरता को को देखते हुए कोतवाली ऋषिकेश पर नियुक्त प्रशिक्षु *आईपीएस निहारिका भट्ट* के नेतृत्व में पुलिस लाइन देहरादून से निरीक्षक श्री *प्रवीण सिंह कोश्यारी* को उक्त मामले के सफल निस्तारण हेतु निस्तारण के लिए आदेशित किया गया, जिस पर अग्रिम कार्यवाही करते हुए पुलिस द्वारा जांच के दौरान घटनास्थल को देखकर मौके पर मिले साक्ष्यों के के आधार पर मौके से अभियुक्त 1- सरदार *परवान सिंह* पुत्र श्री सरदार छोटे सिंह निवासी समीर पुर थाना नजीबाबाद बिजनौर हाल- सेवक गुरुद्वारा कलीधर सभा के पास श्यामपुर ऋषिकेश, को गिरफ्तार किया गया जिससे पूछताछ करने पर अभियुक्त परवान सिंह के द्वारा अपने अपराध को स्वीकार कर लिया गया। अग्रिम विवेचक प्रवीण सिंह कोश्यारी ने विवेचना के दौरान मौखिक, परिस्थिति जनक तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन किया गया, जिसके पश्चात पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में अभियुक्त उपरोक्त के विरुद्ध दिनांक 02/09/17 को आरोप पत्र माननीय न्यायालय प्रेषित किया गया। आरोप पत्र में कुल 14 गवाह रखे गए थे।
उक्त मुकदमे मे जांचकर्ता द्वारा समय-समय पर उक्त केस की पैरवी करते हुए समस्त साक्षियों की साक्ष्य करवाकर गवाही कराई गई। जिस पर पोक्सो अधिनियम न्यायालय द्वारा आज दिनांक 23/08/2018 को अभियुक्त परवान सिंह को उक्त मामले में *सजा-ए-मौत*. ( *फांसी* ) की सज़ा सुनाई गई।

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