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निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दिया मुक्ति पर्व के अवसर पर वर्चुअल में पूरी मानवता के लिए संदेश

धन निरंकार जी।🙏

निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दिया मुक्ति पर्व के अवसर पर वर्चुअल में पूरी मानवता के लिए संदेश

मुक्ति पर्व के अवसर पर 15 अगस्त 2021 को प्रेषित किए गए।

1. आज मुक्ति पर्व के साथ साथ भारत के स्वतंत्रता दिवस को भी मनाया जा रहा है। *आज़ादी सभी को पसंद है चाहे वह विचारो की आज़ादी हो या फिर कर्मों की आज़ादी। किन्तु हम जिस भी देश में रहते हैं हमें वहां के नियम और कानूनों की सीमा में रहकर यह आज़ादी निभानी होती है।

 

2. यदि हम रूह की आज़ादी की बात करें तो हमें यह देखना होगा कि इस आज़ादी का हम कैसे प्रयोग कर रहे हैं। *हमारे सतगुरु और संतों को जिन्हें हमने आज याद किया,उन्हें बहुत तप एवम् त्याग करना पड़ा।* *उनके इस विशाल और दिव्य जीवन के चलते ही उनका यह जीवन भी मुबारक रहा और मृत्यु भी।* इसलिए मुक्ति पर्व के अवसर पर हम उनके जीवन को उत्सव के रूप में स्मरण कर रहे हैं।

 

3. एक फिल्मी गीत की पंक्तियां कुछ इस प्रकार शायर ने लिखी कि अब मुझको हो दीदार मेरा, करदे मुझको मुझसे ही रिहा ’ । यहां अपना दीदार शारीरिक दृष्टि से नहीं कहा गया वह तो आईने के समक्ष सहज ही हो जाता है। यहां *आत्मा की बात हो रही है जो हमारी सदा रहने वाली पहचान है। इस बेरंगे, बेहद, रमे हुए राम, निरंकार प्रभु का रूप है।* शरीर में रहते हुए ही हम इसके एहसास से रिहा हो सकते है। ब्रह्मज्ञानी जीवन मुक्त होकर जीवन जीते हैं।

 

4. शारीरिक पहचान कुछ देर की है परन्तु आत्मिक पहचान तो सदैव रहने वाली है। इसलिए इसे जानकर इसमें स्थित रहना ही मुक्ति है।* सभी संतों, महापुरुषों ने इस सत्य को सदैव ही दोहराया और इसका आसरा भी लिया।

 

5. यदि हम जगत माता जी की बात करें, राजमाता जी की बात करें या फिर सत्गुरु माता सविंदर हरदेव जी का जिक्र करें तो इन सभी ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर मानवता की सेवा की। सभी ने ममता और करुणा से सेवा की और यह प्रमाणित किया कि नर हो या नारी सभी में एक ईश्वर का नूर विद्यमान है।

 

6. आज अनेक भक्तों को भी स्मरण किया गया। सभी के नाम लेना तो संभव नहीं होगा और कई तो ऐसे भी संत होंगे जिन्होंने चुप रहकर बगैर सामने आए उत्तम भाव से भक्ति निभाई।* आज उन्हें भी स्मरण करने का दिन है। नए, पुराने सभी संत जिन्होंने अपना सारा जीवन सच्चाई की राह पर समर्पित कर दिया उन सभी का जीवन मुबारक है।

 

7. सदैव यही अरदास की जाती है कि हमारा अंत सेवा करते हुए हो। कई संत तो सेवा करते हुए ही ब्रह्म में समा गए। कई अपने जीवन के अन्य कार्यों में तो लगे रहे किन्तु ध्यान इस निरंकार में ही लगा रहा। उनको भी अवश्य मुक्ति प्राप्त होगी। आज इन मुक्त आत्माओं से हम सभी ने प्रेरणा लेनी है जिन्होंने जीवन की हर परीक्षा को परमात्मा का आधार लेकर पार किया।

 

8. कई बार यह अरदास की जाती है कि बिना परीक्षा के ही हम पास हो जाएं। *ये पूर्ण शक्तिशाली समरथ परमात्मा हमारे साथ है फिर किसी परीक्षा से क्यों डरना? हम क्यों न यह अरदास करें कि हे परमात्मा!,आप जो भी परीक्षा दो उसके साथ हमें अपना विश्वास और उस परिस्थिति से पार जाने की शक्ति एवम् विवेक भी बक्शना।

 

9. दातार सभी को जीते जी मुक्त करे, और भक्ति की राह पर सभी चलते चले जाएं।

 

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