यूजेवीएनएल में नियुक्तियों और पदोन्नतियों मैं बड़ा फर्जीवाड़ा स्थापना वर्ष से ही धांधली शुरू

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Uk/ विकास नगर देहरादून

*यूजेवीएनएल मे नियुक्तियों और पदोन्नतियों में बड़ा फर्जीवाड़ा स्थापना वर्ष से ही धांधली शुरू*

रिपोर्ट -इलम सिंह चौहान
उत्तराखंड राज्य किस तरह से नेताओं और अधिकारियों के लिए वरदान साबित हुआ है उसकी एक बानगी देखिए किस तरह नेताओं और उच्च अधिकारियों ने अपने चहेते लोगों को आगे बढ़ाया है।

ये बात हम हवा हवाई नहीं कह रहे हैं बल्कि पूरे तथ्यों के साथ आपको बता रहे हैं। दरअसल मामला उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड(यूजेवीएनएल) का है। 2002 में अवर अभियंता (जेई) और 2005 में सहायक अभियंता (एई) और अधिशासी अभियंता के पदों पर सीधी भर्ती से जुड़ा है।
21.08.2002 को शांति प्रसाद और
24.08.2002 को राम सिंह बिष्ट को उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) में संविदा कर्मी से सीधे जेई बना दिया जाता है वो भी बिना किसी लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के?
इसके बाद इन दोनों को 30 जून 2011 को सहायक अभियंता (एई) के पद पर प्रमोशन कर दिया जाता है और 24 जून 2019 को अधिशासी अभियंता बना देते है। जबकि उत्तराखंड जल विद्युत निगम की नियमावली के अनुसार इस तरह से प्रमोशन पाने का कोई प्रावधान नहीं है।

इसी तरीके से 2002 में ही उत्तराखंड पावर कोरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) अवर अभियंता (जेई) के पदों के लिए एक विज्ञप्ति निकालता है। यहां भी पांच लोग
1- मुकेश कुमार।
2- जगदीश सिंह असवाल।
3- अरविंद त्रिपाठी।
4- विपिन चन्द्र।
5- महावीर सिंह।
उत्तराखंड पावर कोरपोरेशन (यूपीसीएल) की परीक्षा में शामिल होते हैं। मगर मजेदार बात यह है कि इन पांचों लोगों को उत्तराखंड पावर कोरपोरेशन (यूपीसीएल) अपने विभाग में ज्वाइनिंग नहीं कराता बल्कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) 28 अक्टूबर 2002 को अपने विभाग में ज्वाइनिंग कराता है। और इन लोगों में से भी उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) अरविंद त्रिपाठी को 30 जून 2011 को सहायक अभियंता (एई) और बाकी के चार लोगों को 28 जून 2012 को सहायक अभियंता (एई) बना देता है। और फिर अरविंद त्रिपाठी को 24 जून 2019 को अधिशासी अभियंता तक बना देता है। मगर यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन पांचों लोगों ने जो लिखित परीक्षा उत्तराखंड पावर कोरपोरेशन (यूपीसीएल) में दी थी उसकी फाइनल सूची में इन पांचों में से किसी का नाम भी नहीं है। अब यहां सवाल ये उठता है कि वो कौनसी शक्तियां और ताकतें थी जिनके बल पर इन सभी लोगों को पहले बिना किसी लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जेई फिर एई और अधिशासी अभियंता तक बना दिया जाता है। और जो लोग लिखित परीक्षा और साक्षात्कार देकर आये है वो पीछे रह जाते हैं।

इतना ही नहीं उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) 2005 में अधिशासी अभियंता के लिए दो पदों पर सीधी भर्ती करता है। इस परीक्षा में आठ लोग भाग लेते हैं। सेलेक्शन बोर्ड इन आठ लोगों में से दो लोगों का चयन अधिशासी अभियंता के लिए कर लेता है। और बाकी लोग इस प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। मगर यहां भी सेलेक्शन बोर्ड राजीव कुमार और मनमोहन बलोदी को सहायक अभियंता (एई) के पद पर नियुक्ति दे देता है और वो भी बिना किसी लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के?
इसके बाद विभाग इन दोनों को अधिशासी अभियंता बना देता है और फिर 7 जुलाई 2020 को राजीव कुमार को उपमहाप्रबंधक (DGM) बना दिया जाता है। जब हमने इस सारे प्रकरण में MD जल विद्युत निगम से बात की तो उन्होंने ये कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि ये सारा मामला अभी सब जुडिशियल है और मेरा इस पर कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। मगर सवाल तो ये है MD साहब कि जब सारा मामला सब जुडिशियल है तो फिर आपने एक व्यक्ति को उपमहाप्रबंधक (DGM) के पद पर प्रमोशन कैसे दे दिया।

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