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लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मन की एकाग्रता जरुरी है ज्ञान प्रचारक महात्मा हेमराज शर्मा जी

पुलिस के द्वारा हिंदी मैगजीन के रिपोर्टर हरपाल खत्री मसूरी देहरादून उत्तराखंड

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मन की एकाग्रता जरूरीः हेमराज शर्मा

देहरादून। मन की एकाग्रता से लक्ष्य मिलता है जो हमारे चेतना स्तर को निर्मल व उज्जवल बनाता है और इससे हम ऊर्जावान होते हैं। सद्गुरु हमारे मन के अन्दर निर्मल विचारों की ज्ञान अमृत को भरता है। जिससे हमारे विचारों में निर्मलता आती है। उक्त उद्गार सन्त निरंकारी भवन में विशाल संत्सग समारोह को सम्बोधित करते हुए मसूरी पधारे हेमराज शर्मा ने सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश देते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि युगों-युगों से सद्गुरु मानव कल्याण के लिए निरन्तर ये कार्य कर रहे है। जो मानव को एकता के सूत्र में पिरोकर मानवीय कल्याणकारी कार्य कर सके। मानव जाति का कल्याण सद्गुरु अपने दिव्य वचनों के द्वारा करते है। यूं तो भगवान श्रीकृष्ण जी और सुदाम जी एक आश्रम में शिक्षा-दीक्षा हासिल की। लेकिन दोनों की जीवन प्रस्थितियां अलग-अलग सी रही है। जैसे विदित ही हो कि एक अमीर और एक गरीब रहा। जबकि ज्ञान दोनों को एक ही मिला था। उन्होंने कहा कि सद्गुरु ज्ञान का दाता होता है जो परमात्मा का बोध करता है और हमारे जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में ज्ञान के साथ आशीर्वाद प्रदान करते है। जिससे हमारे मन की संकीर्णताएं दूर होती है और हृदय में विशालता आती है, दया, करुण, प्रेम, मिलवर्तन के दिव्य गुण स्वतः ही हृदय में प्रकट होते हैं। आज निरंकारी मिशन द्वारा जोनल स्तरीय बाल निबन्ध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जिसमें विकासनगर, डोईवाला, बालावाला, प्रेमनगर एवं ऋषिकेश के बच्चों ने भाग लिया। जिन्होंने अपने लगनशील व कुशाग्र बुद्धि परिचय देते हुए बहुत सुन्दर शब्दों से निबन्ध लिखे। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बाल संतों को मिशन की तरफ से पुरस्कृत किया जायेगा। बाल संगत के इंचार्ज रवि आहुजा व संयोजक कलम सिंह रावत ने यह जानकारी दी है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों प्रभु-प्रेमियों, भाई-बहनों एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गीतों एवं प्रवचनों के माध्यम से निरंकारी माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपाओं का व्याख्यान कर संगत को निहाल किया। मंच का संचालन संचिन पंवार ने किया।

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