संत निरंकारी महाराज सविंदर हरदेव महाराज के प्रवचन

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*सतगुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (25-फरवरी-18, यमुनानगर, हरियाणा)*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना, धन निरंकार जी

1) साध संगत जी,काफी समय पहले एक कहानी सुने को मिली थी की एक टीचर क्लास में एक सफेद कपडा लेके आता है और खोल के बच्चों को दिखाता है
और उस कपड़े पे एक छोटा सा काला धब्बा होता है, वह बच्चों को उसपे एक essay लिखने को बोलता है ,

2) साध संगत जी, कुछ दिन बाद उस assesment के discussion के लिए टीचर बच्चों को बुलाता है,
तो कहता है, इतने बड़े सफेद कपड़े पे आपको और कुछ नही नज़र आया,
सिर्फ एक छोटा सा धब्बा ही नज़र आया ,
क्योंकि अधिकतर बच्चे, जो essay होता है उस पर लिखते है और जो सफेद कपड़े के ऊपर तो थोड़ी-सी लाईन सी लिखके टीचर को submit कर देते है,
और कही पर बच्चे तो पूरे का पूरा essay ही उस काले धब्बे पे लिख देते है,

3) साध संगत जी,
आज के इंसान की भी कुछ ऐसी ही आदत बन गयी है,
ग़लतियां ढूंढने को तैयार रहता है और कई बार तो ऐसा भी हो जाता है
कि एक व्यक्ति को अगर वह जानता भी है यह भी कहता है कि एक बहुत अच्छा इंसान है,
पर अगर उसमे भी कोई बात गलत नज़र आती है तो उसपे discussion शुरू हो जाता है ,
हालांकि मिशन की तो यही शिक्षाये है कि हमने सबसे गुण ही ग्रहण करने है सबके ,

4) साध संगत जी, अपनी बुराईयाँ तो कोई देखता नही सब यही कहते है कि जमाना खराब है,
बाबाजी से आपने एक वो उदहारण सुना की नाली में अगर कोई सोने की चीज़ पड़ी होती है ,
तो जितनी भी गंदगी हो आसपास उसकी परवाह किये बिना
वो चीज़ को उठा लेते है, क्योंकि सोने की कीमत सब जानते है ,

5) साध संगत जी, सोने की कीमत तो फिर भी कमती-बढ़ती होती रहती है,

पर ये जो human values है, ये तो अनमोल है इनकी कीमत हम कभी नही डाल सकते और
जहा हो जैसे हो जिसके अंदर भी हमे ये गुण नज़र आये उसकी गलतियाँ ना देखे बल्कि उनसे ये गुण ग्रहण करे और अपने जीवन मे डाले।

6) साध संगत जी, एक वो संगत में आपने महापुरषों से उदहारण भी सुना कि एक टीचर बच्चे को पहाड़ा सुनाने को बोलता है ,
तो वो बच्चा पहले दो तीन numbers तो ठीक बोल देता है
पर उसके बात वो tune बोलना शुरू कर देता है,
तो टीचर कहता है ये क्या tune गा रहे हो तुम वो बच्चा कहता है में पहाड़ा तो भूल गया मुझे बस tune याद रह गयी है ,
कही ऐसे हमारे साथ तो भी नही हो रहा , _ONENESS, COMPASSION,PEACE_
इनके सिर्फ हम को spelling ही याद है और अपने कर्मो में लाना भूल गए है,

और लोगो के आगे तो हम इन्हें सुना आते हैं , वाह-वाह कमाने के लिए, पर ये सब हमे जीवन मे भी ढालनी है,

औऱ जो भी महापुरष इनको जीवन मे ढाल लेते है, उनका जीवन एक रोशन मिनार होता है, सभको उनके जीवन से सिख मिलती है लेने को ,

7) साध संगत जी, कल ही गुरु पूजा दिवस के अवसर पे आपने देखा ,
इस मिशन के बच्चे-बहनों की तकरीबन 3 लाख बच्चे और बहनों की तरफ से 637 HOSPITALS को clean करने को कहा गया और सब उधर पहुँचे
और इतने अच्छी तरह से सब HOSPITALS की सफाई हुई, GOVERMENT HOSPITALS की,और कई hospitals तो ऐसे थे जैसे वो authorities ने भी कहा कभी ऐसा हमारे hospitals में हुआ नही,
और staff ने भी कभी इस प्रकार सफाई नही करी ।

8) साध संगत जी, निरंकार से यही अरदास है एक-एक संत जो इस जगह बैठा हुआ है
बल्कि इस जगह ही नही इस मिशन का एक-एक संत,
इस मिशन की शिक्षाओं को ग्रहण करे और एक चलता– फिरता अपने आप मे ही मिशन बन जाये,
जिसे बोलो की कम जरूरत पड़े और हमे देख के सब कहे इनके जीवन हमारे जीवन से कितने अलग है

इनके मिशन की शिक्षाये कैसी है,
बाबाजी ने इन्हें कितनी अच्छी शिक्षाये दी है जो ये अपने जीवन मे ढाल के आगे बढ़ रहे है।

प्यारी साध संगत जी, प्यार से कहना धन निरंकार जी।

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