संत निरंकारी सतगुरू माता सविंदर हरदेव जी के प्रवचन

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*सतगुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (18-फरवरी-18, बुराड़ी,दिल्ली)*

 

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना, धन निरंकार जी

 

1) साध संगत जी, इधर बैठके हम सब सभी इस निरंकार प्रभु के गुणगान कर रहे है,एक पुर्ण भक्त हमेशा एक सुकून वाली जिंदगी जीता है,

 

वो जानता है,

 

‘this god knowledge is not a magic to dissolve problems,but it teaches us to deal with them in proper and positive manner,’

 

जब ये प्रभु परमात्मा हर पल हर छीन हमारे अंगसंग है, god is with and within us at all times of life,

फिर जो कुछ भी हो रहा है इसकी रज़ा में ही हो रहा है,

 

2) साध संगत जी,बाबा जी से आपने वो अनेको बार उदहारण सुना कि एक बुज़ुर्ग माता ट्रैन में सफर कर रही थी और अपने सामान की पोटली सिर पे उसने रखी हुई थी।

आसपास के यात्री उसे कहते है समान नीचे रख दे अपने सिर पे इतना भार क्यों रखा हुआ है तूने,

वह आगे से कहती है इस ट्रेन ने पहले ही मेरा भी इतना भार उठाया उठाया हुआ है,

और आसपास जितने भी यात्री है उन सबका भार इस ट्रैन ने उठाया हुआ है ,

 

अगर उस ट्रैन ने उन सबका भार उठाया हुआ है ,

तो तेरी पोटली जो तेरे सिर पे है उसका भार भी तो इस निरंकार ने ही, इस ट्रेन ने ही उठाया हुआ है ,

 

3) इसी प्रकार हम अपनी परेशानिया, छोटी-छोटी बाते, उनका भार अपने ऊपर ढो लेते है और सिर्फ अपना ही नही पर और जो आसपास हो रहा होता है,

दूसरो का भी भार की वो क्या कर रहा है, किसके साथ बात कर रहा है , उसे ये बोलने को क्यों कहा गया,

मुझे क्यों नही कहा गया उसकी ये ड्यूटी है मेरी ये क्यों नही है, इन छोटी-छोटी बातों का भार सब अपने सिर पर ढो लेता है, ये सब हम निरंकार पे छोड़ के एक relax होके इस जिंदगी को क्यों नही जीना चाहते ,

 

4) साध संगत जी जब हर पल इस निरंकार प्रभू का एहसास रहेगा तो हमारा इस जिंदगी जीने का outlook या नज़रिया एक दम change हो जाएगा और,

 

5) साध संगत जी, हम दूसरों में उनकी negativity या अवगुण देखने के बदले अगर निरंकार के दर्शन करेंगे तो फिर वही बात अवतार बाणी में भी लिखा है,

 

_हर पत्ते विच्च सूरत तेरी हर पत्ते विच्च तेरा वास ,_

_ऐहदर ओधर चार चुफारे तेरी सूरत ताकदा हाँ_

 

6) साध संगत जी, इस नज़रिये से जिंदगी जीने वाले महापुरष एक चैन की जिंदगी जीते है , और अपनी जिंदगी में खुशहाली और भक्ति वाला जीवन लेके आ पाते है।

 

प्यारी साध संगत जी, प्यार से कहना धन निरंकार जी।

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