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दिव्यता और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर देहरादून बाला वाला निरंकारी संत समागम


देहरादूनए 24 मई 2026 . श्रद्धाए भक्तिए प्रेम एवं आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण दिव्य वातावरण में परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में रविवार को बांसवाड़ाए शिवप्रिया फामए बालावाला में भव्य निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में यह संदेश दिया कि मनुष्य जन्म केवल सांसारिक जीवन जीने के लिए नहीं अपितु परमात्मा को जानकर उससे इकमिक होने की अवस्था है। यही मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य है।
इस दिव्य आयोजन में सतगुरु माता जी ने श्रद्धालुजनों को सम्बोधित करते हुए फरमाया कि कण.कण में बसे परमात्मा का एहसास हर एक गुरुसिख के जीवन में विनम्रताए दयाए करुणा प्रेम के भाव को उजागर करता प्रत्येक व्यक्ति की जीवन यात्रा अलग होती हैए इसलिए दूसरों का आंकलन करने के बजाय आत्ममंथन कर स्वयं को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। परमात्मा का एहसास जीवन का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए.ऐसा एहसास जो केवल अनुमान या कल्पना से नहींए बल्कि प्रत्यक्ष दर्शनए प्रेमए आस्था एवं भक्ति से प्राप्त होता है। जब मनुष्य गुरुसिख संबंध को समझते हुए गुरमत के मार्ग पर चलता हैए तब उसके जीवन में दिव्य गुण स्वतः ही विकसित होने लगते हैं।
सतगुरु माता जी ने आगे कहा कि जब परमात्मा से प्रेम होता है तो संपूर्ण सृष्टि से प्रेम होने लगता है और जातिए रूप.रंगए अमीर.गरीब जैसे भेदभावों से ऊपर उठ जाता है। सच्चा संत वही है जो मानवता को जोड़ने का कार्य करेए सबके प्रति समान भाव रखे और मिलवर्तन की भावना के साथ जीवन व्यतीत करे। गुरु की शिक्षा केवल सुनने तक सीमित न रहकर जीवन में उतरनी चाहिएए तभी वास्तविक आध्यात्मिक परिवर्तन संभव होता है।