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लखवाड़ बांध प्रभावितों ने विभिन्न मांगों को लेकर रोका निर्माण कार्य

इलम सिंह चौहान

यमुना नदी पर निर्माणाधीन 300 मेगावाट क्षमता की बहुउद्देश्यीय लखवाड़ जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर परियोजना का निर्माण कार्य बंद करा दिया। प्रभावित ग्रामीण बीते शुक्रवार, 24 अक्टूबर से निर्माण स्थल पर धरने पर बैठे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) लगातार प्रभावितों के हितों की अनदेखी कर रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शनिवार शाम को ग्रामीणों ने यूजेवीएनएल को अल्टीमेटम देते हुए परियोजना का कार्य रुकवा दिया और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रभावितों ने कहा कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाए। अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा कैंपटी बाजार के वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार तय किया जाए। परिवार रजिस्टर के आधार पर परिवारों की गणना कर सभी को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीति का लाभ दिया जाए। साथ ही एलएनटी कंपनी से हटाए गए स्थानीय श्रमिकों की पुनः बहाली की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि प्रभावित गांव कूणा, रणोगी और लोहारी के काश्तकारों का विस्थापन रायशुमारी के बाद किया जाए तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को प्रति माह 600 यूनिट निशुल्क बिजली दी जाए।

धरना स्थल पर पहुँचीं धनोल्टी की उप जिलाधिकारी मंजू राजपूत एवं यूजेवीएनएल अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, परंतु प्रभावित किसी सक्षम अधिकारी के लिखित आश्वासन के बिना आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हुए।

एसडीएम मंजू राजपूत ने बताया कि “बांध प्रभावितों की अधिकांश मांगों पर जिलाधिकारी टिहरी ने संज्ञान लिया है, जबकि कुछ बिंदुओं पर शासन को पत्र भेजा गया है। इस पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।”

सूत्रों के अनुसार, धरना स्थल परियोजना कार्यक्षेत्र की सीमा से 300 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद बांध प्रभावितों द्वारा कार्य बंद करवाया जाना सरकारी कार्य में बाधा माना जा सकता है। विभाग आंदोलनरत लोगों पर एफआईआर दर्ज करने पर भी विचार कर रहा है।

धरना देने वालों में महिपाल सजवाण, महेंद्र सिंह पुंडीर, सुंदर सिंह चौहान, डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत, संदीप तोमर, सुंदर सिंह, आनंद सिंह तोमर, अनिल पंवार, आनंद रावत, सियाराम चौहान और प्रेम सिंह रावत सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।

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