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मसूरी ट्रेड्स ने सलीब ए हुसैनी पर अल्पाहार व पानी वितरित किया।


इस मौके पर मसूरी टेªडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने बताया कि यह पर्व दुःख मनाने का होता है जिसके तहत 14सौ वर्ष पूर्व जब तारीख ए इस्लाम करबला में युद्ध चल रहा था तो सभी सैनिकों व लोगों को भूखा रखा गया था जिसमें बच्चे भी शामिल थे। इस मौके पर पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हो गये थे। इसी उददेश्य को लेकर यह पर्व मनाया जाता है ताकि कोई भूखा व प्यासा न रहे अत्याचार न हो इसके तहत शोक दिवस मनाया जाता है। इसका असली मकसद सभी में भाईचार व सभी समान रहे। मसूरी में पहली बार यह पर्व मनाया गया। मसूरी में सदभावना बनी रहे जिसके तहत यह पर्व मनाया गया मिल कर रहें इसी संदेश के साथ यह पर्व मनाया गया। मौलाना फिरोज मेहदी ने कहा कि सबीले इमामे होता है। इसी के तहत यह पर्व मनाया गया। उन्होंने बताया कि इमामे हुसैन व उनके परिवार व बच्चों को करबला में प्यासा व भूखा रखा गया है। उनकी याद में खाना व पानी दिया जाता है ताकि कोई भूखा व प्यासा न रहे। उन्होंने बताया कि मसूरी में पहले चालीस साल पहले यह पर्व मनाया जाता था व ताजिया भी निकाला जाता था, लेकिन अब कई वर्षों बाद इस पर्व को मनाया जा रहा है। भविष्य में यहां भी ताजिया निकाला जायेगा इसमें सरकार का साथ चाहिए सरकार की अनुमति के बिना यह नहीं किया जायेगा। इस मौके पर जाकिर हुसैन, खादिम हुसैन, जुल्फिकार हुसैन, मुश्ताक हुसैन, आफाक हुसैन, इकरार हुसैन, मौहम्मद यामीन सहित व्यापार संघ के सचिव जगजीत कुकरेजा, कोषाध्यक्ष नागेद्र उनियाल, उपाध्यक्ष अतुल अग्रवाल, तनमीत खालसा, देवी गोदियाल, शिव अरोड़ा, संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।