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पर्यटन विभाग को जानकारी ही नहीं कि जार्ज एवरेस्ट का कौन सा जन्म दिवस है।

पर्यटन विभाग को जानकारी ही नहीं कि जार्ज एवरेस्ट का कौन सा जन्म दिवस है।

मसूरी। विश्व के जाने माने सर्वेयर जनरल सर जार्ज मसूरी का पर्यटन विभाग ने 24 करोडं रूपये खर्च कर जार्ज एवरेस्ट हाउस का सौदर्यीकरण तो कर दिया लेकिन उसके बाद उसे राम भरोसे छोड़ दिया। आश्चर्य की बात है कि इस महान सर्वेयर का जन्म दिन भी अब केवल खानापूर्ति के रूप में मनाया जा रहा है। सर जार्ज एवरेस्ट के 234वें जन्म दिन पर पर्यटन विभाग ने किसी को सूचना नहीं दी।

और विभाग के मसूरी स्थित सहायक पर्यटन अधिकारी हीरा लाल आर्य व उनके कर्मचारी जार्ज एवरेस्ट हाउस गये व वहां जाकर उनकी प्रतिमा लाने की बात की तो वहां की चाबी भी उनके पास नहीं थी। इसके बाद उन्होंने हाउस के पीछे उनके बुत पर गये व मात्र एक माला पहना कर इतिश्री कर दी वहीं उनका एक चित्र तक नहीं ला पाये। जार्ज एवरेस्ट मसूरी 1932 में आये थे व करीब 12 सालों तक यहीं पर रहे। वहीं आश्यर्च की बात है कि पर्यटन विभाग के अधिकारियों को उनके जन्म की तिथि भी मालूम नही थी उन्होंने एवरेस्ट का 137वां जन्म दिन मनाया व एक किलो मिठाई अपने कर्मचारियों को बांट कर इतिश्री कर दी। जबकि उनका जन्म 1790 में हुआ था व उनकी मृत्यु 1866 में हुई थी। पर्यटन विेभाग किस आधार पर 137वां जन्म दिन मना रहा है यह भी एक बड़ा सवाल है व विभाग की जानकारी पर प्रश्न चिन्ह है। जिस सर जाार्ज एवरेस्ट पर करोड़ो रूपये खर्च किया गया व भवन का जीर्णोद्धार किया गया अब उस भवन के चारों ओर झाड़ झंकार उग आयी है उसे तक साफ नहीं किया गया। यहीं नहीं यहां पर एक म्युजियम भी बनाया गया है जो बनने के बाद से अभी तक नहीं खुला।
बाक्स सर जार्ज एवरेस्ट का 234 वां जन्म दिन पर्यटन विभाग ने सादगी से सर जार्ज एवरेस्ट हाउस जाकर मनाया। इस मौके पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज सहित विभाग के अधिकारी कर्मचारी व पर्यटक मौजूद रहे।
इस मौके पर पर्यटन अधिकारी हीरा लाल आर्य ने बताया कि सर जार्ज एवरेस्ट का 137वां जन्म दिन है जिसे सादगी से मनाया गया व उनकी प्रतिमा पर जाकर माल्यार्पण किया गया। उन्होंने बताया कि सर जार्ज एवरेस्ट ने मसूरी में रहकर ही पूरे भारत का नक्शा बनाया व हिमालय की चोटियों को नापा। पर्यटन विभाग ने सर जार्ज एवरेस्ट हाउस का सौदर्यीकरण करवाया व यहां पर पर्यटकों के लिए काटेज बनी है वहीं हैली सेवा भी शुरू की गई है। इस मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने कहा कि जार्ज एवरेस्ट भारत के सर्वे जनरल रहे वह 1832 में आ गये थे व 1843 में रिटायर होकर वापस इंग्लैड चले गये थे। उन्होंने कहा कि यहां पर उन्हांेने फील्ड वर्क व पेपर वर्क किया। भारत का जो नक्शा था उन्होंने यहीं पर बनाया। उनका 234 वां जन्म दिन है व पर्यटन विभाग हर साल उनका जन्म दिवस मनाते हैं। मसूरी वालों के लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एड्रूय वॉक ने विश्व की सबसे उंची चोटी का नाम एवरेस्ट रखा व बाद में वह मसूरी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ने एवरेस्ट हाउस का सौदर्यीकरण किया उनका भवन जर्जर हो गया था जिसे ठीक कराया गया है। उनका भारत के भौगोलिक इतिहास में बड़ा योगदान है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। इस मौके पर डीआईजी रिटायर शिव कुमार व पर्यटक मौजूद रहे।

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