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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड कुलपति से 1.47 करोड़ की ठगी, दो आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार

इलम सिंह चौहान

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट के जरिये 1.47 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले दो शातिरों को दिल्ली के करोलबाग से दबोच लिया। दोनों आरोपियों ने रूहेलखंड विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त कुलपति को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बनकर 12 दिन तक घर में “डिजिटल अरेस्ट” कर रखा था।

एसटीएफ ने बताया कि आरोपियों ने पीड़िता को झांसा दिया कि उनके नाम से बैंक खाते में 60 करोड़ रुपये आए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज हुआ है। खाते के वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें डरा-धमकाकर लगातार व्हाट्सऐप कॉल पर बात की और 12 दिन में अलग-अलग खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये जमा करा लिए।

पहले भी एक गिरफ्तारी

इससे पहले 31 अगस्त को इसी मामले में एक आरोपी को हिमाचल के सोलन से गिरफ्तार किया जा चुका है।

ऐसे दिया वारदात को अंजाम

ठग खुद को महाराष्ट्र साइबर क्राइम का अधिकारी बताते थे। व्हाट्सऐप कॉल पर पीड़िता से कहा गया कि वे किसी से बात न करें और केस निपटाने के लिए बैंक खातों का वेरिफिकेशन जरूरी है। डराकर रकम अलग-अलग खातों में डलवाई गई और तुरंत आगे ट्रांसफर कर दी गई।

गिरफ्तार आरोपी

1. मोहम्मद सैफ (24), निवासी लखनऊ, उत्तर प्रदेश

2. शकील अंसारी (23), निवासी साहबगंज, झारखंड

पुलिस ने इनके पास से 9 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 7 ब्लैंक/हस्ताक्षरित चेक, 4 डेबिट कार्ड, एक पासपोर्ट और एक कंपनी की फर्जी मोहर बरामद की है।

जनता से अपील

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि “डिजिटल अरेस्ट” एक बड़ा साइबर घोटाला है। इसमें ठग पुलिस, सीबीआई या ईडी अफसर बनकर व्हाट्सऐप/वीडियो कॉल करते हैं और ड्रग्स तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि—

ऐसे कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें।

किसी भी तरह का पैसा ट्रांसफर न करें।

तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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