देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस का प्रदर्शन राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता के सामने आधा सच रखकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है, जबकि राज्य में भर्ती विवादों की शुरुआत कांग्रेस के शासनकाल में ही हुई थी।
चौहान ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2002 की पटवारी भर्ती और 2002-03 की दरोगा भर्ती को लेकर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद वर्ष 2015-16 की दरोगा भर्ती तथा 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती भी जांच और विवाद के दायरे में रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि भर्ती व्यवस्था पर सबसे पहले सवाल उसके शासनकाल में ही क्यों उठे।
उन्होंने वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले तत्कालीन विधानसभा में हुई 103 नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना रहा। उस समय तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पर नियुक्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगे और बाद में यह मामला न्यायालय एवं जांच एजेंसियों तक पहुंचा।
भाजपा मीडिया प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस आज युवाओं के भविष्य की चिंता का दावा कर रही है, लेकिन उसे अपने शासनकाल के भर्ती विवादों और नियुक्तियों पर भी जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों को दबाने के बजाय त्वरित और सख्त कार्रवाई की। एसटीएफ ने जांच कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, प्रभावशाली लोगों पर भी कार्रवाई हुई और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तक को जेल जाना पड़ा। इसके साथ ही राज्य सरकार ने नकल विरोधी सख्त कानून लागू कर भर्ती माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने का काम किया।
मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि धामी सरकार का फोकस केवल जांच का दिखावा करने के बजाय दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करना रहा है। उन्होंने दावा किया कि यूटीयू पेपर लीक मामले में आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों में प्रभावशाली लोगों को भी कोई राहत नहीं दी गई और आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई जांच से भी सरकार ने परहेज नहीं किया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था चाहता है। इसलिए कांग्रेस को भाजपा पर आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल के भर्ती विवादों का भी आत्ममंथन करना चाहिए।