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कार्मिकों की पीड़ा को लेकर मोर्चा ने दी शासन में दस्तक, गोल्डन कार्ड धारक कार्मिकों के कैशलेस इलाज का है मामला।


जिसमें सिर्फ वन टाइम कटौती होगी। नेगी ने कहा कि प्रदेश के कार्मिकों एवं पेंशनर्स को गोल्डन कार्ड की विसंगतियां एवं अन्य लापरवाही के चलते अधिकांश सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण कार्मिक,खास तौर पर पेंशनर्स व निगमों के कर्मचारी (जिनको पेंशन नहीं मिलती) इलाज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। कई पेंशनर संसाधन ही नहीं जुटा पाते उनको सिर्फ ऊपर वाले के रहमों करम पर निर्भर रहना पड़ता है। कई पेंशनर्स तो रिश्तेदारों व दोस्तों से उधारी व ब्याज पर कर्ज लेकर इलाज करा रहे हैं, जोकि बहुत ही चिंताजनक है। नेगी ने कहा कि छोटी-मोटी बीमारी का करने का इलाज कराने के लिए कर्मचारी साधन जुटा लेता है, लेकिन हृदय संबंधी व अन्य जटिल/ आपात स्थिति में समुचित संसाधन- पैसा न होने के कारण कई बार कार्मिकों की जान पर बनती है, जिसको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मोर्चा कर्मचारियों को उनके हाल पर मरने- तड़पने के लिए नहीं छोड़ सकता। प्रतिनिधि मंडल में- प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद थे।