लेवल-2 प्रशिक्षण शुरू करने की उठी मांग, प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र के साथ वितरित की गई परफ्यूमरी किट
विकासनगर/सेलाकुई। सुगंध की दुनिया अब युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का नया माध्यम बनती जा रही है। परफ्यूम निर्माण के क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के उद्देश्य से सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (पारडी) में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का शनिवार को समापन हो गया। कार्यशाला में उत्तराखंड समेत देश के सात राज्यों से पहुंचे 19 युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और सीखे गए हुनर का प्रदर्शन करते हुए स्वयं के सिग्नेचर परफ्यूम तैयार किए।
कार्यशाला के अंतिम दिन फ्रैगरेंस क्रिएशन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अलग-अलग सुगंधों के संयोजन से अपनी पसंद के परफ्यूम विकसित किए। इसके बाद इवैल्यूएशन बूथों पर तैयार किए गए परफ्यूम की गुणवत्ता और सुगंध की बारीकियों का परीक्षण किया गया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण में उत्तराखंड के अलावा महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक के युवाओं ने प्रतिभाग किया।
परफ्यूमरी को बताया रोजगार और उद्यमिता का बेहतर विकल्प
समापन समारोह में उत्तराखंड शासन की अपर सचिव (कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग) निधि यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने लैमनबाम का पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने युवाओं को परफ्यूमरी के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि परफ्यूमरी के क्षेत्र में नवीन सुगंधों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। युवा इस क्षेत्र में उद्यमिता को अपनाकर न केवल अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। सुगंध उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
बिना पूर्व अनुभव के सीखा परफ्यूम निर्माण
कार्यशाला में शामिल
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनमें से कई की परफ्यूमरी के क्षेत्र में पहले कोई पृष्ठभूमि नहीं थी। इसके बावजूद प्रशिक्षण के दौरान उन्हें परफ्यूम निर्माण के मूल सिद्धांतों, सुगंधों के चयन, उनके संयोजन और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशिक्षण ने उनके सामने स्वरोजगार और अपना व्यवसाय शुरू करने की नई संभावनाएं खोली हैं। उन्होंने संस्थान प्रबंधन से जल्द ही परफ्यूमरी का लेवल-2 प्रशिक्षण शुरू करने की मांग भी की, ताकि इस क्षेत्र में और अधिक विशेषज्ञता हासिल की जा सके।
स्कूल ऑफ परफ्यूमरी का छठा सफल बैच
संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि पारडी का स्कूल ऑफ परफ्यूमरी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। परफ्यूमरी और एरोमैटिक्स के क्षेत्र में आयोजित यह छठा सफल प्रशिक्षण बैच था। उन्होंने बताया कि संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कई युवा अपने स्टार्टअप स्थापित कर चुके हैं और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। संस्थान का उद्देश्य युवाओं को सुगंध उद्योग से जुड़ी तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि निधि यादव ने सभी 19 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण करने के प्रमाणपत्र और घर पर परफ्यूम विकसित करने के लिए विशेष परफ्यूमरी किट वितरित की। प्रमाणपत्र और किट पाकर प्रतिभागियों के चेहरे खिल उठे।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक-सी डॉ. जफर हैदर, प्रशिक्षण समन्वयक एवं वैज्ञानिक-बी डॉ. गरिमा देवलाल, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जाहन्वी, प्रतीक्षा और रोहित मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा देवलाल ने किया।