मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में इन दिनों पहाड़ का सबसे सुंदर जंगली फल काफल का पर्यटक जमकर आनंद ले रहे हैं। इसका खटटा मीठा स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना देता है। काफल का पेड़ औषधीय गुणों के कारण राज्य राजकीय वृक्ष है। गर्मी के मौसम में मालरोड पर टहलते पर्यटक जब रोड के किनारे बैठे लाल सुर्ख दानों को देखते हैं तो इसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। व इसका स्वाद लेने को आतुर होते हैं। यहं जंगली पहाड़ी फल हर किसी को अपने स्वाद का दीवाना बना देता है। मालरोड पर विभिन्न स्थानों पर काफल टोकरी में बेचने वाले बैठे रहते हैं। मालूम हो कि काफल का खटटा मीठा रसीला स्वाद ऐसा होता है कि इसके खाने से पर्यटक को आनंद आता है व गर्मी में ठंडक प्रदान करता है। वहीं यह औषधीय फल भी है तो कई रोगों के उपचार में काम आता है। इन दिनों मसूरी के आसपास के जंगल काफल के फलांे से लदे हैं जिन्हें ग्रामीण तोड़ कर लाते हैं व बाजार में बेचते हैं। जिससे ग्रामीणों की आर्थिकी में भी मदद मिलती है। इसके पेड़ की छाल भी बहुत उपयोगी होती है जिसके कारण इसके पेड़ को संरक्षित पेड़ों की श्रेणी में रखा गया है। इसके फल में पौष्टिक तत्वों की भरमार रहती है जिसमें कार्बोहाइडेªट, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फाइबर, वसा, पोटेशियम की भरपूर मात्रा पायी जाती है। यह भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी मिलता है इसका वानस्पतिक नाम मिरिका ऐस्कुलेटा है यह मिरिकेसियाई परिवार का हिस्सा है। काफल दो हजार मीटर की उंचाई पर पाया जाता है। उत्तराखंड में इसकी महत्ता का पता इसी बात से चलता है कि इस फल पर कई गीत, कविताएं व कहानियां लिखी गई हैं। तथा यह यहां की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।